Saturday, September 19, 2020
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पितृपक्ष की अष्टमी पर होता है पिता का श्राद्ध, इस व‍िध‍ि से करें पूर्ण

आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर गया के विष्णुपद के 16 वेदी नामक मंडप में 14 स्थानों के साथ ही पास के मंडप में दो स्थानों पर पिंडदान करने का विधान है। सोलह वेदी तीर्थ में शेष पांच वेदियों क्रौंच पद वेदी, मतंग पद वेदी, अगस्त पद वेदी, इंद्र पद वेदी व कश्यप पद वेदी शामिल है। इसमें से कश्यप पद वेदी पर पिंडदान को श्रेष्ठ माना गया है। प्राचीन काल में भारद्वाज मुनि ने कश्यप पद पर श्राद्ध किया था। इसलिए इस वेदी पर श्राद्धकर्म का फल दोगुना प्राप्त होता है।