Thursday, August 22, 2019
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राजाजी नेशनल पार्क: इस सिस्टम के जरिए दुर्घटनाओं से बचाई जाएगी हाथियों की जान

राजाजी पार्क से होकर गुजरने वाले 18 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर जंगली हाथियों को रेलगाडियों से होने वाली दुर्घटनाओं से बचाने के लिए जल्द ही ‘एडवांस एनिमल डिटेक्शन सिस्टम’ स्थापित किया जायेगा । राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पी के पात्रो ने बताया कि यह सिस्टम अगले छह माह में स्थापित कर दिया जायेगा।

विदित हो कि पार्क की हरिद्वार और कांसरो रेंज से गुजरने वाले इस रेलवे ट्रैक पर अभी तक दो दर्जन से अधिक जंगली हाथियों सहित कई वन्यजीव रेलागाडियों की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं । पात्रो ने कहा कि इस ट्रैक के विद्युतीकरण के बाद ऐसी दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक हो गयी थी जिसके चलते वन्य जीवों की जीवन रक्षा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी की तकनीकी पर आधारित यह प्रणाली स्थापित की जा रही है । 

उन्होंने कहा कि इस 18 किलोमीटर लंबी पटरी को एलिफेंट प्रूफ बैरिकेडिंग से कवर कर दिया जाएगा और केवल उन छह स्थानों पर बेरिकेडिंग नहीं की जाएगी जहाँ से जंगली हाथी प्रायः आवागमन करते रहे हैं। पात्रो ने कहा कि इन चिन्हित छह स्थानों पर रेलवे ट्रैक से 50 मीटर की दूरी पर दोनों ओर 10 सीस्मिक सेंसर और थर्मल कैमरे लगाए जाएंगे। ये सेंसर तथा कैमरे किसी भी आवागमन पर कम्पन का पता चलते ही सूचना सेंट्रल सर्वर को भेजेंगे। 

सर्वर में लगा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तथा सॉफ्टवेयर सूचना का अध्ययन करेगा और हाथी के मौके पर होने की पुष्टि होने पर एलर्ट जारी कर गश्त कर रहे स्टाफ, रिज़र्व प्रशासन, रेलवे के लोको पायलट तथा पास के रेलवे स्टेशन को सूचित करेगा। इस प्रणाली को चंडीगढ़ स्थित भारत सरकार के ‘सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंटेशन रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ ने विकसित किया है। देश में पहली बार प्रयोग में लायी जा रही इस टेक्नोलॉजी के पायलेट प्रोजेक्ट में उत्तराखंड सरकार के राजाजी टाइगर रिजर्व के साथ केंद्रीय वन मंत्रालय, भारतीय वन्यजीव संस्थान एवं डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूएफ पार्टनर के रूप में सहयोग कर रहे हैं।

पात्रो ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी लागत के हिसाब से किफायती होगी। इसकी मदद से गश्त पर लगे मानव संसाधन का ज्यादा बेहतर तरीके से और सटीक स्थानों पर ही सदुपयोग होगा। टेक्नोलॉजी से मानवीय भूलों के कारण होने वाली गलतियों की संभावना न्यूनतम स्तर पर आ जायेगी। सबसे बड़ा फ़ायदा तो यह होगा कि रेलवे ट्रैक पर दुर्घटना से जंगली हाथियों के जीवन की रक्षा सम्भव हो सकेगी।