Sunday, September 23, 2018
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श्राद्ध में इन वस्तुओं से करें परहेज, पितृ होंगे प्रसन्न

शुक्रवार से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गया है और यह 30 सितम्बर तक चलेगा। अश्विनी मास के कृष्ण पक्ष के इन पंद्रह दिनों में मांगलिक कार्य वर्जित रहते है। ऐसे में गृहस्थों को धर्म—ध्यान, जप—तप एवं पितरों के मोक्ष के लिए तर्पण करना चाहिए। श्राद्धपक्ष पितरों के मोक्ष से जुड़ा होने के कारण शुद्धता एवं संयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

इनसे करें परहेज।  श्राद्ध तिथि वाले दिन तेल लगाने, दूसरे घर का अन्न खाने और स्त्री प्रसंग से परहेज करें। श्राद्ध में राजमा, मसूर, अरहर, गाजर, कुहड़ा, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज-लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली, कैंथ, महुआ और चना आदि वस्तुओं का प्रयोग ना करें। इन वस्तुओं को श्राद्ध में वर्जित माना गया है।

श्राद्ध में इनका करें प्रयोग। श्राद्ध में धान, गेहूं, जौ, तिल, सरसों का तेल, मूंग आदि ग्रहण कर सकते हैं, इसके अलावा आम, आंवला, अनार, खीरा, नारियल, खजूर का सेवन भी अच्छा माना जाता है। केले का फल श्राद्ध में नहीं चढ़ाना चाहिए, ना ही इसका सेवन करना चाहिए।

श्राद्ध में ये जरूर करें। श्राद्ध में निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोने चाहिए। इस कार्य के समय पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए।

– ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि यानी, गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।

– गाय के लिए पत्ते पर ‘गो ये नम:’ मंत्र पढक़र भोजन सामग्री निकालें।

– कुत्ते के लिए भी ‘द्वौ श्वानौ नम:’ मंत्र पढक़र भोजन सामग्री निकालें।

– कौए के लिए ‘वायसे यो नम:’ मंत्र पढक़र भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।

– देवताओं के लिए ‘देवादि यो नम:’ मंत्र पढक़र और चींटियों के लिए ‘पिपलीकादि यो नम:’ मंत्र पढक़र भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें। इसके बाद भोजन के लिए थाली अथवा पत्ते पर ब्राह्मणों को भोजन परोसें।

दक्षिणाभिमुख होकर कुश, तिल और जल लेकर पितृतीर्थ से संकल्प करें और एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं। भोजन के उपरांत यथाशक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। ऐसा श्रद्धापूर्वक करने से पितर तृप्त होते हैं और वे आशीर्वाद देने के लिए विवश हो जाते हैं। आपके कार्य व्यापार, शिक्षा अथवा वंश वृद्धि में आ रही रुकावटें दूर होंगी।