Tuesday, September 25, 2018
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साइलेंट किलर बनी दिल्ली की हवा

एनजीटी द्वारा कई कड़े कदम उठाए जाने के बाद राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या थमने का नाम नहीं ले रही। इस बीच अब देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स ने दिल्ली की हवा में बढ़ रहे प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई है। एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के मुताबिक, दिल्ली में वायु की गुणवत्ता अति निम्न स्तर तक पहुंच चुकी है और हालात मेडिकल इमरजेंसी जैसे बन चुके हैं। इस बीच दिवाली के नजदीक आने पर राजधानी में प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की संभावना है।

एम्स निदेशक के मुताबिक, बेशक इस साल पटाखों की बिक्री पर बैन है लेकिन पटाखे फोड़ने पर नहीं. इसीलिए लोगों को खुद पटाखों से दूर रहना होगा। प्रदूषण के लिए सिर्फ पटाखे जिम्मेदार नहीं है, बल्कि खुले में कूड़ा-कचरा जलाने, लगातार हो रहे कंस्ट्रक्शन और त्यौहार के दिनों में बढ़ने वाली आवाजाही भी प्रदूषण के कारक हैं। सिविक एजेंसियों को ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान सही तरीके से लागू कराना होगा। दिल्ली की हवा की सेहत सुधारने से ही दिल्ली वालों की सेहत सुधर सकती है। आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में पीएम 2.5 का सुबह 8 बजे 306 एमजीसीएम यानी कि अति निम्न स्तर तक पहुँच गया, जबकि पीएम 2.5 का नॉर्मल स्तर 60 एमजीसीएम होता है। दिल्ली के मथुरा रोड में भी पीएम 2.5 का स्तर 326, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 335, पीतमपुरा में 305, दिल्ली एयरपोर्ट पर 309 एमजीसीएम तक पहुंच गया है।

दिवाली से पहले ही जिस तेजी से दिल्ली की आबो-हवा में प्रदूषित कणों की मात्रा बढ़ रही है ये इशारा करता है कि आने वाले दिन दिल्ली की सेहत के लिए ठीक नहीं होगा। डॉक्टर गुलेरिया के मुताबिक दिल्ली की हवा साइलेंट किलर बन चुकी है। पिछले कुछ साल से सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों की तादाद में भी इज़ाफ़ा हुआ है। लोगों को पता ही नहीं चलता कि कैसे ये जहरीली हवा धीरे-धीरे उनकी सेहत ख़राब कर रही है।आंकड़ों के मुताबिक, रविवार सुबह 8 बजे राजधानी में प्रदूषण का स्तर 300 माइक्रोग्राम को पार गया जो कि सामान्य से 5 गुना ज्यादा है।