Thursday, October 18, 2018
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हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर जारी, हाइवे समेत 150 सड़कें बंद, बिजली-पानी भी ठप

तीन दिन से जारी मूसलाधार बारिश ने हिमाचल में तबाही मचा दी है। जगह-जगह भूस्खलन हो रहे हैं। चार नेशनल हाईवे समेत करीब डेढ़ सौ छोटी-बड़ी सड़कें ठप हो गई हैं। कई इलाकों में पानी और बिजली नहीं है। शिमला, मंडी, सिरमौर और कुल्लू जिले में सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं।शिमला, चंडीगढ़ और किन्नौर की ओर जाने वाले यात्री परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

फसलें भी बारिश की भेंट चढ़ रही हैं। सूबे में इस मानसून से अभी तक करीब 200 करोड़ का नुकसान हो चुका है। ऊना की जलग्रां खड्ड में एक दस वर्षीय बालक की खड्ड में डूबने से मौत हो गई। नयनादेवी में पहाड़ी से पत्थर गिरने से पंजाब का बाइक सवार श्रद्धालु घायल हो गया है।मंडी के हणोगी के पास चट्टान गिरने से 12 घंटे चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे बंद रहा।

यहां ईंटों से भरा ट्रक भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें दो लोग घायल हो गए। रविवार रात 10 बजे बंद हुआ एनएच सोमवार सुबह 10 बजे बहाल हुआ।रामपुर उपमंडल के नजदीक झाकड़ी में ब्रौनी नाले में सोमवार सुबह बाढ़ आने से एनएच-5 यातायात के लिए चार घंटे तक बंद रहा। सेब से भरे ट्रक और छोटी गाड़ियां यहां फंसी रहीं।

आनी में एनएच 305 सोमवार को भी बंद रहा। शिमला-नाहन नेशनल हाईवे भी भूस्खलन की वजह से करीब 12 घंटे तक ठप रहा।गिरि नदी में सिल्ट बढ़ने से गिरिनगर पावर प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन ठप हो गया है। ब्यास, सतलुज, रावी, पांवटा में यमुना एवं बाता सहित कई अन्य नदियां उफान पर हैं।

शिमला में भारी बारिश के बाद पहाड़ी से मलबा गिरने से कई गाड़ियां दब गई।प्रदेश में इस साल बारिश आफत बनकर बरस रही है। इस वजह से अब तक करीब 203 करोड़ का नुकसान हो चुका है। अकेले आईपीएच और पीडब्लयूडी विभाग को ही करीब डेढ़ सौ करोड़ की चपत लगी है। शिमला में ढारों पर गिरा देवदार का पेड़।आम लोगों की करीब पचास करोड़ की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। यह आंकड़ा दो सौ करोड़ पार करने पर सरकार ने सभी डीसी की बैठक बुलाई है।

मंगलवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसमें अब तक हुए नुकसान और संभावित नुकसान को कम करने पर चर्चा होगी। मानसून से पहले हुई बैठक में दिए निर्देशों पर हुई कार्रवाई का रिव्यू भी किया जाएगा। विशेष सचिव आपदा प्रबंधन, राजस्व डीडी शर्मा ने बताया कि प्री मानसून बैठक में सभी डीसी, विभिन्न विभाग अध्यक्षों को विभिन्न निर्देश दिए थे