Tuesday, January 16, 2018
Breaking News
Home / STATE NEWS / Uttarakhand / उत्तराखंड के 12 हजार गावों को 158 साल बाद मिलेगी अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति!

उत्तराखंड के 12 हजार गावों को 158 साल बाद मिलेगी अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति!

सरकार की चुनौती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देहरादून जिले के अंतर्गत आने वाले चकराता क्षेत्र के त्यूणी में थाना खोलने के लिए राज्य सरकार को जमाना लग गया। जबकि त्यूणी थाना उस क्षेत्र में लगातार बढ़ते अपराध की घटनाओं को देखते हुए सबसे ज्यादा मांग के अनुरूप था।

देश को आज़ाद हुए सात दशक से ज्यादा होने के बाद भी उत्तराखंड जैसे शिक्षित प्रदेश के हजारों पर्वतीय गांवों में अंग्रेजी शासन काल में बनाये गए कानून चल रहे थे। उत्तराखंड राज्य बनने के समय भी इस बदहाल व्यवस्था ने निज़ात पाने के लिए पर्वतीय इलाकों के लोगों ने मांग उठाई, लेकिन किसी सरकार ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया।


आखिरकार हाईकोर्ट ने इस मामले को पेचीदा मानते हुये सालों पुरानी मांग को जायज ठहराते हुए अंग्रेजों के बनाये कानून से बहार निकलने की उम्मीद जगाई है। जानकारों की मानें तो  वर्ष 1816  में कुमाऊं में तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के 16  पद सृजित किये थे, जिसमें इनको राजस्व कार्यभार, भू अभिलेखों के साथ पुलिस की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 1874 में पटवारी पद का विस्तारीकरण हुआ। साल 1916 में पटवारियों की नियमावली में अंतिम संशोधन किया गया। बाद में दुर्गम पर्वतीय इलाकों के अलावा 1956 में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी पटवारी को दी गई। 
उत्तराखंड के अपर पुलिस महनिदेशक अशोक कुमार का मानना है कि बदलते दौर के साथ समाज में कई तरह के बदलाव आए हैं, उसी तरह  अपराध करने का पैटर्न भी दिनों दिन बदलता जा रहा है। ऐसे में राजस्व पुलिस जैसी पुरानी व्यवस्था किसी भी तरह से सही नहीं दिखती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *