Saturday, August 18, 2018
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त्रिवेंद्र सरकार के 6 माह : केंद्र की मदद से उत्तराखंड के सपनों को पंख लगाती सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने 6 महीने का कार्यकाल पूरा कर लिया है.

इस मौके पर जारी प्रेस नोट के अनुसार आम जनता, गरीब, पिछड़े और दलित समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार ने अपने इस छह महीने के अल्पकार्यकाल में कुछ ठोस निर्णय लिए हैं. मुख्यमंत्री की स्पष्ट सोच रही है कि समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाएं पहुंचे. विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र व्यक्ति को मिले. इसके लिए उन्होंने कार्यभार ग्रहण करने के दिन से ही पहल शुरू कर दी थी. आम आदमी की पहुंच सरकार तक हो, इसके लिए कुछ प्रयास किये है, जिनके सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं.

कहा गया कि मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने का काम किया है. सरकारी कामकाज में अधिक से अधिक आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सकें. मुख्यमंत्री जनता से स्वयं सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं, इसके लिए आधुनिक तकनीक का भी पूरा उपयोग कर रहे है. आज फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल मीडिया सबसे सरल माध्यम हैं, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकता है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आम जनता से सीधा संवाद कायम किया जाए, जन समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जाय. जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान हो, इसके लिए समाधान पोर्टल को और अधिक प्रभावी बनाया गया है. समाधान पोर्टल के साथ ही शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर 1905 हेल्पलाइन की व्यवस्था की गई है तथा आईवीआरएस के माध्यम से स्थानीय बोलियों में भी शिकायतें दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

सेवा के अधिकार अधिनियम को और अधिक सशक्त बनाया गया है, इसके दायरे में अन्य आवश्यक सेवाओं को शामिल कर 150 सेवाओं की सूची तैयार की गई है. ब्लॉक स्तर तक बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कर दी गई है. विभिन्न अनियमित्ताओं की त्वरित जांच हेतु एसआईटी का गठन किया गया है. सीएम डेशबोर्ड जैसी अभिनव पहल शुरू की गई है. इसके माध्यम से विभागों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी, जिस पर सीधा नियंत्रण मुख्यमंत्री कार्यालय का होगा.

मुख्यमंत्री ने सबसे पहले राज्यहित में कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें 2019 तक हर घर को बिजली एवं शत-प्रतिशत साक्षरता, 2022 तक सबको घर, किसानों की आय दोगुनी करने तथा 5 लाख बेरोजगार युवाओं के लिए कौशल विकास का लक्ष्य रखा गया है. इन लक्ष्यों से समझा जा सकता है कि राज्य सरकार का फोकस आमजन के हित में है. इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अधिकारियों को निर्देश ही जारी नहीं किए गए हैं बल्कि इसके लिए ठोस कार्ययोजना भी तैयार करने को कहा गया है और इस दिशा में कार्य शुरू भी हो गया है.

पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अन्तर्गत शेष 63 ग्रामों का विद्युतीकरण दिसम्बर, 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. समस्त परिवारों को 2019 तक विद्युत कनेक्शन देने का लक्ष्य है. बिजली चोरी रोकने के लिए ओवरहेड एलटी लाइनों को एलटीएवी केबल प्रयोग करने का निर्णय लिया गया है. 5 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को राज्य के स्थायी निवासियों हेतु आरक्षित किया गया है. उजाला एलईडी योजना के तहत 39 लाख एलईडी बल्ब वितरित कर दिए गए हैं. मार्च 2018 तक 100 लाख एलईडी बल्ब वितरण का लक्ष्य रखा गया है. सरकारी दफ्तरों में एलईडी का उपयोग अनिवार्य किया गया है.

उत्तराखण्ड का ग्रामीण क्षेत्र खुले में शौच मुक्त होने वाला देश का चौथा राज्य बना है. राज्य में स्वच्छता अभियान को भारत सरकार का बेस्ट प्रेक्टिसेज दर्जा मिला है. शहरी स्वच्छता कार्यक्रम के लिए मार्च, 2018 तक सभी 92 शहरी निकायों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य पूरा करने का दायित्व जिलाधिकारियों को दिया गया है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और अन्य राजस्व कार्यों हेतु 1000 पटवारी भर्ती करने का निर्णय लिया गया है. पर्वतीय चकबंदी कार्य के लिए अधिनियम और नियमावली के लिए कृषि मंत्री की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है. मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के स्वयं के गांव से चकबंदी आरम्भ करने का निर्णय लिया गया है.

उत्तराखण्ड में 100 जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे. राज्य के 6 अस्पतालों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सुविधा का लक्ष्य रखा गया है. वर्षों से मैदानी जनपदों में तैनात डॉक्टरों की पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती सुनिश्चित की गई है. प्रदेश में सेना के 70 सेवानिवृत्त डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी. श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सेना के माध्यम से संचालित करने हेतु कार्यवाही चल रही है. राज्य में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को देखते हुए टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी की व्यवस्था का निर्णय लिया गया है.

प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए ’13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू डेस्टिनेशन्स’ के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में कम से कम एक नS पर्यटन स्थल का विकास किया जाएगा. खरसाली-यमुनोत्री रोप-वे, गोविन्दघाट-घाघरिया रोप-वे व गुच्चुपानी-मसूरी रोप-वे का निर्माण किया जाएगा. प्रदेश में हॉस्पिटेलिटी यूनिवर्सिटी की स्थापना का निर्णय लिया गया है. कुमांऊ एवं गढ़वाल मण्डल विकास निगमों का विलय किया जाएगा. राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे व ‘एपिक सर्किट’ विकसित करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है.

प्रदेश में वर्ष 2018 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों के आयोजन हेतु तेजी से कार्य कराए जा रहे हैं. खिलाड़ियों को प्रतिदिन डाइट हेतु 250 रुपये देने का निर्णय लिया गया है. नेशनल गेम्स में अधिक पदक जीतने के उद्देश्य से 12 खेलों का चयन किया गया है.

इस लंबे प्रेस नोट में और भी कई विभागों में किए गए कामों का ज़िक्र किया गया है.