Wednesday, October 17, 2018
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द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लेने वाले कीर्ति चक्र विजेता कर्नल इंदर का निधन

कीर्ति चक्र विजेता रिटायर्ड कर्नल इंदर सिंह रावत का वीरवार सुबह निधन हो गया। वह 104 वर्ष के थे। उनके रेसकोर्स स्थित आवास पर परिचित और पूर्व सैनिकों ने उनके अंतिम दर्शन किए। जिस शान के साथ कर्नल इंदर ने आर्मी का जीवन जिया, उसी शान के साथ उनको अंतिम विदाई भी दी गई। ग्यारहवीं गढ़वाल राइफल्स की सैन्य टुकड़ी ने उनके घर पर पहुंचकर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। उनकी शव यात्रा भी सेना के बैंड बाजों की धुन के साथ निकली। कर्नल इंदर का अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया गया।

 

इस दौरान सेना के जीओसी और गढ़वाल राइफल्स के सीओ ने भी सम्मान दिया। कर्नल इंदर सिंह रावत के बेटे राजेंद्र रावत भी सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर हैं। दूसरे बेटे हरेंद्र सिंह रावत नेवी में कमांडर हैं। कर्नल इंद्रर सिंह रावत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ दूसरे विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। इसके बाद 1943 में उन्होंने आर्मी में कमीशन लिया। इसके बाद उन्होंने पांचवीं गढ़वाल बटालियन और आईटीबीपी की दूसरी बटालियन की शुरुआत की। उन्हें 1957 की नागालैंड वार के दौरान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

 

पौड़ी के एक गांव में सन 1915 में इन्दर सिंह रावत का जन्म हुआ था। शिक्षा पूरी करने के बाद वह फौज में भर्ती हो गए। दूसरे विश्व युद्ध में उनकी बहादुरी के चलते उनको सेना में कमीशन मिला। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने उत्तराखंड पूर्व सैनिक संगठन में बतौर अध्यक्ष कार्य किया। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान वह पूर्व सैनिकों का नेतृत्व कर रहे थे। पिता की उपलब्धियों को याद करते हुए हरेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई दवा नहीं खाई। शुरू से ही वे स्वस्थ थे। आज सुबह भी उन्होंने पहले पानी पिया और जैसे ही उनके लिए चाय लेने गए, तब तक उन्होंने देह त्याग दिया।