Saturday, December 16, 2017
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देहरादून: इस निर्दलीय विधायक की भाजपा से बढ़ रही नजदीकियां!

देहरादून-  राज्‍य ब्‍यूरो: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार की अब भाजपा से नजदीकियां बढ़ने की चर्चाएं बड़ रही हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में निर्दलीय विधायकों का गठबंधन पीडएफ अहम भूमिका में रहा। इसी गठबंधन का हिस्सा रहे प्रीतम सिंह पंवार को सरकार ने पीडीएफ कोटे से मंत्रीपद दिया था। यह बात अलग रही कि विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने पार्टी टिकट से चुनाव न लड़ने वाले पीडीएफ के सभी सदस्यों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे। चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला।

 

स्थिति यह रही कि कांग्रेस बामुश्किल 11 सीटें ही जीत पाई। भाजपा की इस प्रचंड लहर में केवल दो निर्दलीय विधायकों ने जीत दर्ज की। इनमें प्रीतम सिंह पंवार पीडीएफ के एकमात्र मंत्री रहे जो अपनी सीट बचाने में सफल रहे। चुनाव के बाद उन्होंने सरकार को समर्थन देने की बजाए विपक्ष में बैठने को तवज्जो दी। वहीं दूसरे निर्दलीय विधायक रामसिंह कैड़ा ने विधानसभा के पहले सत्र में विपक्ष में बैठने के बाद दूसरे सत्र में सरकार को समर्थन दे दिया। इसके बाद यह माना जा रहा था कि निर्दलीय प्रीतम सिंह पंवार भी भाजपा को समर्थन दे सकते हैं। यह बात इसलिए भी उठी क्योंकि प्रीतम सिंह पंवार का विधानसभा क्षेत्र पिछड़े इलाके में आता है। कहा गया कि क्षेत्र के विकास और अपनी राजनीतिक जमीन को जिंदा रखने के लिए वे भाजपा के नजदीक आ सकते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी को समर्थन देने के ऐलान ने इन चर्चाओं को बल दिया। हालांकि, धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने इससे इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि वे किसी का समर्थन नहीं कर रहे हैं और विपक्ष में ही बैठे हुए हैं।

 

देहरादून, [राज्‍य ब्‍यूरो]: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार की अब भाजपा से नजदीकियां बढ़ने की चर्चाएं हैं। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को उनकी ओर से दिया गया समर्थन इन चर्चाओं को बल दे रहा है। हालांकि, प्रीतम सिंह पंवार का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को समर्थन देना अलग विषय है। वह अभी विपक्ष में ही बैठे हैं।   पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में निर्दलीय विधायकों का गठबंधन पीडएफ अहम भूमिका में रहा। इसी गठबंधन का हिस्सा रहे प्रीतम सिंह पंवार को सरकार ने पीडीएफ कोटे से मंत्रीपद दिया था। यह बात अलग रही कि विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने पार्टी टिकट से चुनाव न लड़ने वाले पीडीएफ के सभी सदस्यों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे। चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला। स्थिति यह रही कि कांग्रेस बामुश्किल 11 सीटें ही जीत पाई।

 

भाजपा की इस प्रचंड लहर में केवल दो निर्दलीय विधायकों ने जीत दर्ज की। इनमें प्रीतम सिंह पंवार पीडीएफ के एकमात्र मंत्री रहे जो अपनी सीट बचाने में सफल रहे। चुनाव के बाद उन्होंने सरकार को समर्थन देने की बजाए विपक्ष में बैठने को तवज्जो दी। वहीं दूसरे निर्दलीय विधायक रामसिंह कैड़ा ने विधानसभा के पहले सत्र में विपक्ष में बैठने के बाद दूसरे सत्र में सरकार को समर्थन दे दिया।    इसके बाद यह माना जा रहा था कि निर्दलीय प्रीतम सिंह पंवार भी भाजपा को समर्थन दे सकते हैं। यह बात इसलिए भी उठी क्योंकि प्रीतम सिंह पंवार का विधानसभा क्षेत्र पिछड़े इलाके में आता है। कहा गया कि क्षेत्र के विकास और अपनी राजनीतिक जमीन को जिंदा रखने के लिए वे भाजपा के नजदीक आ सकते हैं। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी को समर्थन देने के ऐलान ने इन चर्चाओं को बल दिया।    हालांकि, धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने इससे इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि वे किसी का समर्थन नहीं कर रहे हैं और विपक्ष में ही बैठे हुए हैं।

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