Saturday, August 18, 2018
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सिक्खों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट खुले, बर्फ से ढका है धाम

सिक्खों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब के कपाट शुक्रवार खुल गए हैं। इसके साथ ही हेमकुंड साहिब यात्रा शुरू हो गयी है। इससे पहले सुबह 8 बजे घांघरिया से पंच प्यारों की अगुवाई में यात्रियों का जत्था हेमकुंड के लिए रवाना हुआ। सुबह दस बजे कपाट खुले। इसके बाद पहली अरदास शुरू हो गई है।

जो बोले सो निहाल के जय घोष के साथ हेमकुंड साहिब के लिए दो हजार सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था गोविंदघाट से गुरुवार रवाना हुआ था। श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष जनक सिंह एवं उपाध्यक्ष नरेन्द्र जीत सिंह बिन्द्रा ने पवित्र स्वरूपा पहनाकर जत्थे को रवाना किया। पहले दिन लगभग पांच हजार तीर्थ यात्री हेमकुंड साहिब पहुंचे हैं।

इस वक्त हेमकुंड साहिब पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है। गोविन्दघाट में बुधवार की देर शाम तक तीन हजार सिख यात्री पहुंच चुके थे। इनमे से लगभग एक हजार सुबह चार बजे गोविन्दघाट से घांगरिया के लिए पैदल रवाना हुए। जबकि शेष दो हजार तीर्थ यात्री पंच प्यारों की अगुवाई में पहले जत्थे के रूप में गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे गोविन्दघाट से घांगरिया को निकले। गोविन्दघाट में जत्थे को रवाना करने की प्रक्रिया सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुई।

सबसे पहले गुरुद्वारे में अरदास की गई, जिसके बाद सबद कीर्तन एवं सुखमनी साहब का पाठ हुआ। सभी श्रद्धालुओं ने गुरुग्रंथ साहब के आगे शीष झुकाकर सुखद हेमकुंड यात्रा की मनौतियां मांगी। शुक्रवार को हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के बाद इस बार खिचड़ी एवं चाय प्रसाद दिया गया। गुरुद्वारा कमेटी के उपाध्यक्ष नरेन्द्र जीत सिंह बिन्द्रा ने बताया कि इस बार यात्रा को लेकर सिख लोगों में खासा उत्साह है।

पंजाब का बैंड भी पहुंचा गोविन्दघाट 

गोविन्दघाट गुरुद्वारे के प्रबंधक सेवा सिंह ने बताया कि इस बार पंजाब से स्वंय सेवकों का एक बैंड कपाटोत्घाटन पर हेमकुंड पहुंचा है। बताया कि अभी तक घांगरिया में 400 घोड़े खच्चर एवं गोविन्दघाट पुलना में 350 घोड़े खच्चर पहुंच चुके हैं। बताया कि पिछले कुछ वर्षों से गुरुद्वारे की निस्वार्थ सेवा करने के लिए आर्मी के सीओ कदम एवं सुबेदार मेजर गुरुनाम सिंह को 25 मई को हेमकुंड गुरुद्वारे में सम्मानित किया जाएगा।

कपाट खुलने की प्रक्रिया 

25 मई शुक्रवार को सुबह 10 बजे हेमकुंड साहिब के कपाट खुले
10.15 बजे पंच प्यारों द्वारा गुरु स्वरूप दरबार साहिब को सचखंड से लाकर सुखासन पर विराजमान किया गया।
10.20 बजे पर पहली अरदास शुरू हुई।
10.30 बजे सुखमनी साहब का पाठ आरंभ हुआ
11. 30 बजे से सबद कीर्तन चल रहा है।
12.30 बजे से दूसरी अरदस होगी।
12.45 बजे हुक्मनामा का पाठ होगा
1.00 बजे बजे संतों का इतिहास सुनाया जायेगा।
2.00 बजे से सबद कीर्तन शुरू होंगे जो रात्री 9 बजे तक चलेंगे।

जोशीमठ से हेमकुंड तक रहने की उचित व्यवस्था 

देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार निकटतम रेलवे स्टेशन है। जबकि देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक देश के विभिन्न हिस्सों से हवाई सेवाएं संचालित होती हैं। यहां से गोविंदघाट तक बस-टैक्सी या निजी वाहन से पहुंचा जा सकता है। गोविंद घाट से पैदल रास्ता है। देहरादून से जोशीमठ की दूरी 289 किमी, ऋषिकेश से जोशीमठ की दूरी 254 और हरिद्वार से जोशीमठ की दूरी 279 किमी है। सबसे पहले यात्रियों के लिए जोशीमठ मुख्य बाजार में एक गुरुद्वारा है, जहां एक हजार लोग ठहर सकते हैं। जोशीमठ से 22 किमी आगे गोविन्दघाट में एक विशाल गुरुद्वारा हैं। इसमें दस हजार लोग ठहर सकते हैं। गोविन्दघाट से 15 किमी चढ़ाई के बाद भ्यूंडार में भी एक गुरुद्वारा है। इसमें लगभग साढ़े छह हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है।

हेमकुंड साहिब में ढाई फीट से अधिक बर्फ जमीं

जोशीमठ नगर भारत-तिब्बत की सीमा पर अंतिम नगर पालिका क्षेत्र है, जहां एक बड़ा बाजार है। इसके बाद गोविन्दघाट में छोटा सा बाजार है। गोविन्दघाट से हेमकुड की पैदल चढ़ाई शुरू होती है। 15 किमी का पैदल रास्ता पार कर घांगरिया पहुंचते हैं, जो इस यात्रा का रात्री पड़ाव है। यहां पर 100 से अधिक लाज एवं ढाबे हैं। यहां से अगली सुबह 5 किमी की चढ़ाई पार कर हेमकुंड साहिब पहुंचा जाता है। इसी चढ़ाई वाले मार्ग में अलटाकोटी नामक स्थान में 100 मीटर लंबा ग्लेशियर पसरा हुआ है, जिसे काटकर इसके बीचों बीच से यात्रा के लिए रास्ता बनाया गया है। हेमकुंड में अभी भी ढाई फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है।

प्राचीन लोकपाल मंदिर के कपाट भी खुले

जोशीमठ। भ्यूंडार घाटी के रक्षक त्रेतायुगी भगवान लक्ष्मण लोकपाल के मंदिर के कपाट गुरुवार को प्रातः नौ बजे खोल दिए गए हैं। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने वनवास के दौरान हेमकुंड सरोवर के किनारे कठोर तप किया था। इसके बाद उन्हें घांगरिया पुलना घाटी के रक्षक अर्थात लोकपाल का दर्जा मिला। हेमकुंड गुरुद्वारे के उत्तर पूर्व में भगवान लोकपाल का अतिप्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के प्रति हिन्दु धर्मावलंबियों की गहरी आश्था है। लोकपाल मंदिर के कपाट प्रतिवर्ष हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के साथ खुलते एवं बंद होते हैं। मंदिर के कपाट खुलने को लेकर घांगरिया के हक हकूकधारियों में खासा उत्साह है।