Friday, October 19, 2018
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उत्तराखंड सरकार की नजूल नीति को हाईकोर्ट ने किया निरस्त, लगाया 5 लाख का जुर्माना

नजूल भूमि पर मालिकाना हक को लेकर हाईकोर्ट नैनीताल ने बड़ा फैसला दिया है। इस सम्बंध में बनाई गई सरकार की नजूल नीति को कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इतना ही नहीं गलत नीति को बनाने के लिये सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह जुर्माना राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के खातों में जमा होगा। सरकार को नजूल भूमि को कब्जामुक्त करने के स्पष्ट आदेश भी जारी किये गये हैं। रूद्रपुर के पूर्व सभासद राम बाबू व उत्तराखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता रवि जोशी ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकार की नजूल नीति एक मार्च 2009 को चुनौती दी थी।

 

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि राज्य सरकार ने नजूल भूमि को अवैध रूप से कब्जा कर रह रहे लोगों के पक्ष में मामूली नजराना लेकर फ्री होल्ड कर रही है। जो कि असंवैधानिक व नियम विरूद्ध है। इसके अलावा हाई कोर्ट ने इस नजूल नीति का स्वतः संज्ञान लेते हुये मामले को इन रिफ्ररेंस नजूल पालिसी आफ द स्टेट फार डिस्पोजिंग एंड मैनेजमेंट आफ नजूल लैंड नाम से जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में अपने निणर्य में भी नजूल भूमि के उपयोग के लिये  व्यवस्था दी है। इसके बावजूद भी सरकार नजूल भूमि का सार्वजनिक उपयोग करने के बजाय अवैध कब्जेदारों व व्यक्ति विशेष के पक्ष में कर रही है जिसमें गरीब जनता जिसको वास्तव में जरूरत है उसकी अनदेखी की गई है।

पाल सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लोकतंत्र रूल आफ लॉ से चलता है और सरकार की यह नीति रूल आफ ला के खिलाफ है।

नजूल भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाय और जरुरतमंद लोगों को जिनमें बीपीएल, गरीब, एससी, एसटी व ओबीसी श्रेणी के लोग शामिल हों के पक्ष में आवंटित किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में नजूल भूमि के अवैध कब्जेदारों के पक्ष में फ्री होल्ड हुई जिसमें 1900 एकड़ भूमि केवल नगर निगम रुद्रपुर में है उसे निरस्त करने को कहा है।