Monday, September 24, 2018
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हेलीकॉप्टर से नीचे नहीं उतरते हैं झारखंड के सीएम, हर महीने खर्च करते हैं डेढ़ करोड़ !

सुबोधकांत सहाय ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सीएम को इस बात का एहसास होना चाहिए कि पद से उतरने के बाद उन्हें इसी सड़क से यात्रा करनी है। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा कि पिछले ढाई साल में वो अपने घर केवल एक ही बार सड़क से गए हैं। मुख्यमंत्री न केवल अपने घर बल्कि सभी जगह हवाई यात्रा ही करते हैं। राजधानी से जमशेदपुर की दूरी लगभग सवा सौ किलोमीटर है। लेकिन इसके बावजूद वो हवाई यात्रा ही करते है। पिछले ढाई साल का आंकड़ा देखें तो मुख्यमंत्री की केवल रांची-जमशेदपुर की हवाई यात्रा का शतक पूरा होनेवाला है।
 हैरत की बात तो यह है कि हाल ही में तमाड़ से आजसू विधायक विकास सिंह मुंडा की शादी में रांची भी सीएम हेलीकाप्टर से ही गए, जबकि राजधानी से वहां की दूरी बमुश्किल 70 किलोमीटर भी नहीं होगी। इतना ही नहीं जमशेदपुर के अलावे राज्य के अन्य इलाकों की बात करें तो भी उनकी प्राथमिकता हवाई यात्रा ही होती है। पूर्व सीएम अर्जुन ने राज्य के पांचो प्रमंडल में बाकायदा सड़क यात्राएं की थी, ताकि लोगों से उनकी कनेक्टिविटी बनी रहे।

पिछले डेढ़ दशक से राज्य सरकार एक निजी कंपनी से भाड़े में हेलीकाप्टर लेकर अपना काम चला रही है और वो भी कई दफा धोखा दे चुका है। सरकारी सूत्रों की माने तो झारखंड सरकार अभी पांच सीट वाले आर्यन एविएशन कंपनी का अगस्टा-109 हेलीकॉप्टर यूज कर रही है। किराये के मद से इस कंपनी को एक घंटा हवा में रहने की एवज में फिलहाल 3 लाख रुपए से भी ज्यादा रुपए मिलते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार झारखंड सरकार हर महीने औसतन 40 से 50 घंटा यूज कर रही है, जिसके बदले में कंपनी को सरकार हर महीने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान कर रही है। अगर सालाना इस आंकड़े को गुणा भाग करें तो सालाना 18 करोड़ रुपए हेलीकॉप्टर को किराए के रुप में दिए जा रहे हैं।  2001 से लेकर अबतक तक सरकार हेलीकॉप्टर के किराए में ही 300 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुकी है।

राज्य के सिविल एविएशन विभाग के एक बड़े अधिकारी के अनुसार राज्य गठन के बाद से जितना पैसा किराए के हेलीकॉप्टर को लेने में लगा दी, उतने में राज्य सरकार खुद 20 से ज्यादा हेलीकॉप्टर खरीद लेती। लेकिन अभी तक राज्य सरकार के पार अपना कोई हेलीकॉप्टर नहीं है।