Tuesday, January 22, 2019
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हर्षोल्लास के साथ शुरू हुई कैलाश मानसरोवर की यात्रा

दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुक्रवार से शुरू हो गई है। 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे श्रेष्ठ कैलाश मानसरोवर को लेकर मान्यता है कि यह भगवान शिव का स्थायी निवास है। चीन के तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं।
आपको बता दें कि इसके अलावा एक छोटा कैलाश धाम भी है जो उत्तराखंड की सीमा पर भारत के इलाके में है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए 2 रास्ते हैं। पहला उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा है और दूसरा सिक्किम का नाथुला दर्रा। कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए नेपाल से होकर जाना पड़ता है। पिछले साल चीन ने नाथुला दर्रे को बंद कर दिया था, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार नाथुला दर्रा खुला है।
लखनपुर से नजंग के मध्य खराब मार्ग को लेकर चल रहे असमंजस के बीच कैलास मानसरोवर यात्रियों को अब पैदल ही शिव धाम तक पहुंचना होगा। हेलीकॉप्टर द्वारा पिथौरागढ़ से गुंजी उतारे जाने का प्रस्ताव स्थगित हो चुका है।
पहले की तरह ही कैलाश मानसरोवर यात्रा श्रीनारायण आश्रम से पैदल होगी। पांच पैदल पड़ाव पार कर यात्रा दल तिब्बत में प्रवेश करेगा। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने कैलास मानसरोवर यात्रा और भारत चीन व्यापार के संबंध में आयोजित बैठक में इसकी घोषणा की।
बुधवार को आयोजित बैठक में कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में लखनपुर से नजंग के मध्य 1600 मीटर मार्ग को लेकर चर्चा की गई। पिथौरागढ़ के डीएम ने कहा कि कैलास मानसरोवर यात्रा अपने परंपरागत मार्ग से ही हो रही है। जनप्रतिनिधियों ने चीन सीमा लिपूलेख तक निर्माणाधीन सड़क में अनावश्यक विलंब के लिए बीआरओ को जिम्मेदार ठहराया।