Thursday, September 20, 2018
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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बोले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद : एकजुट होकर गरीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर करें

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि देश एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है, ऐसे में ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में उलझने और निरर्थक विवादों में पड़ने की बजाए सभी को एकजुट होकर ग़रीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। देश के 72वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आज हम अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जो अपने आप में बहुत अलग है। आज हम कई ऐसे लक्ष्यों के काफी क़रीब हैं, जिनके लिए हम वर्षों से प्रयास करते आ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि आज हम एक निर्णायक दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में हमें इस बात का ध्यान रखना है कि हम ध्यान भटकाने वाले मुद्दों में न उलझें और ना ही निरर्थक विवादों में पड़कर अपने लक्ष्यों से हटें।

राष्ट्रपति ने इस संदर्भ में सबके लिए बिजली, खुले में शौच से मुक्ति, सभी बेघरों को घर और अति-निर्धनता को दूर करने के लक्ष्य के पहुँच में आने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज जो निर्णय हम ले रहे हैं, जो बुनियाद हम डाल रहे हैं, जो परियोजनाएं हम शुरू कर रहे हैं, जो सामाजिक और आर्थिक पहल हम कर रहे हैं, उन्हीं से यह तय होगा कि हमारा देश कहाँ तक पहुंचा है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ यह भारत देश ‘हम सभी लोगों’ का है, न कि केवल सरकार का। एकजुट होकर, हम ‘भारत के लोग’ अपने देश के हर नागरिक की मदद कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एकजुट होकर, हम अपने वनों और प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण कर सकते हैं, हम अपने ग्रामीण और शहरी पर्यावास को नया जीवन दे सकते हैं। हम सब ग़रीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर कर सकते हैं।’’ एकजुटता के महत्व को रेखांकित करते हुए कोविंद ने कहा कि हम सब मिलकर ये सभी काम कर सकते हैं। यद्यपि इसमें सरकार की प्रमुख भूमिका होती है, परंतु एकमात्र भूमिका नहीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में बदलाव और विकास तेजी से हो रहा है और इस की सराहना भी हो रही है। कोविंद ने कहा कि हमारे सामने, सामाजिक और आर्थिक पिरामिड में सबसे नीचे रह गए देशवासियों के जीवन-स्तर को तेजी से सुधारने का अच्छा अवसर है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज अभियान के दायरे में उन 117 आकांक्षी जिलों को भी शामिल कर लिया गया है, जो आज़ादी के सात दशक बाद भी हमारी विकास यात्रा में पीछे रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज अभियान का कार्य केवल सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। यह अभियान सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से चल रहा है । और हमें अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों और परियोजनाओं का पूरा-पूरा उपयोग करना है। कोविंद ने कहा कि इस बार स्वाधीनता दिवस के साथ एक खास बात जुड़ी हुई है। आगामी 2 अक्टूबर से, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के समारोह शुरू हो जाएंगे।
समाज में महिलाओं की विशेष भूमिका को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि एक राष्ट्र और समाज के रूप में हमें यह सुनिश्‍चित करना है कि महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ने के सभी अधिकार और क्षमताएं सुलभ हों। देश के 72वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ जब हम महिलाओं के काम-काज और व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाते हैं, तब हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘महिलाओं की हमारे समाज में एक विशेष भूमिका है। कई मायनों में महिलाओं की आज़ादी को व्यापक बनाने में ही देश की आज़ादी की सार्थकता है।’’
कोविंद ने कहा कि यह सार्थकता, घरों में माताओं, बहनों और बेटियों के रूप में, तथा घर से बाहर अपने निर्णयों के अनुसार जीवन जीने की उनकी स्वतन्त्रता में देखी जा सकती है । उन्हें अपने ढंग से जीने का, तथा अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करने का सुरक्षित वातावरण तथा अवसर मिलना ही चाहिए। महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं अपनी क्षमता का उपयोग चाहे घर की प्रगति में करें या फिर हमारे कार्यबल या उच्च शिक्षा-संस्थानों में महत्वपूर्ण योगदान देकर करें…. उन्हें अपने विकल्प चुनने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए। कोविंद ने कहा कि एक राष्ट्र और समाज के रूप में हमें यह सुनिश्‍चित करना है कि महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ने के सभी अधिकार और क्षमताएं सुलभ हों।