Tuesday, January 16, 2018
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उस पत्रकार को भी जानिए जो अपनी बहादुरी से बाबा राम रहीम के साम्राज्य की जड़े हिला दी

इंडियन न्यूज़ नेटवर्क : साध्वी यौन शोषण मामले दोषी करार दिए गए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को आज यानि सोमवार को सीबीआई कोर्ट ने 20 साल की सश्रम कारावास की सजा और 30 लाख रुपए जुर्माना लगाया है।

उल्लेखनीय है कि इस पूर मामले में एक शख्स ऐसा रहा जिसे इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। उस शख्स का नाम है पत्रकार रामचंद्र छत्रपति। आपको बता दें कि रामचंद्र ने ही सबसे पहले साल 2002 में राम रहीम के खिलाफ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी पीड़ित साध्वी की चिट्ठी अपने अखबार में छापी थी। इसके बाद रामचंद्र ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट तथा अन्य शीर्ष संस्थाओं को लिखकर डेरा में हो रहे अनैतिक कृत्यों की पोल खोली थी।
पत्रकार की गोली मारकर हत्या 
लेकिन रामचंद्र को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। 24 अक्टूबर 2002 को डेरा अनुयायियों ने उनके घर पर ही गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल छत्रपति ने लगभग महीने भर अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ी और 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई।
हाईकोर्ट ने लिया था संज्ञान 
इस पूरे मामले में पत्रकार के बेटे अंशुल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सीबीआई जांच करवाने के लिए याचिका दायर की, 2002 में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। आपको बता दें कि रामचन्द्र पहले वकील थे, जिन्होंने 2000 में अपना अखबार ‘पूरा सच’ निकालना शुरू किया।
हत्या का केस विचाराधीन 
उल्लेखनीय है कि डेरा प्रमुख के खिलाफ सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति तथा डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्याओं तथा डेरा अनुयायियों को नपुंसक बनाने के मामले भी चल रहे हैं तथा इनमें भी सुनवाई अब अंतिम चरण में है। रणजीत सिंह इसी पीड़ित साध्वी के भाई थे।
पत्रकार के बेटे ने फैसले पर संतोष जताया
डेरा में संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा करने वाले मृत पत्रकार के पुत्र अंशुल छत्रपति ने फैसले पर संतोष जताया। उसने कहा, मैं फैसले से संतुष्ट हूं। मैं पहले से ही कहता था, राम रहीम समाज का दुश्मन है।

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