Friday, May 25, 2018
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उत्तराखंड का 13 वर्ष पुरानी सहकारिता सहभागिता योजना प्रदेश सरकार ने की बंद

उत्तराखंड में विकास पुरुष के नाम से चर्चित नारायण दत्त तिवारी के शासनकाल में सीमांत किसानों व गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों की आय में वृद्धि व जीवन स्तर सुधारने के लिए शुरू की गई सहकारिता सहभागिता योजना को  खत्म कर दिया है। इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाले किसानों को अब दीन दयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना के तहत लाभ मिलेगा। एनडी सरकार के समय में 28 मई 2005 को सहकारिता सहभागिता योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत सामान्य और सीमांत किसानों तथा गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले गरीब परिवारों को कृषि, कृषि यंत्र, पशुपालन, डेयरी आदि के लिए पांच से साढ़े पांच प्रतिशत ब्याज की दर पर ऋण देने का प्रावधान था।

 

वर्ष 2016 में इस योजना की समयावधि खत्म होने से पहले तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने एक शासनादेश के तहत इसका कार्यकाल 31 मार्च 2019 तक के लिए बढ़ा दिया था। पिछले साल अगस्त महीने में त्रिवेन्द्र सरकार ने इस योजना की समीक्षा की और पात्र किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। शुक्रवार ग्यारह मई को अचानक इस योजना को खत्म कर दिया गया। इस मामले में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। सहकारिता सचिव मीनाक्षी सुंदरम का कहना है कि प्रदेश में एक अक्टूबर 2017 से दीन दयाल उपाध्याय किसान योजना लागू है।

महज दो फीसदी ब्याज पर मिलता है ऋण
दीन दयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना के तहत सीमांत व सामान्य किसानों के साथ ही गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को महज दो प्रतिशत ब्याज की दर पर कृषि और व्यावसायिक ऋण दिए जा रहे हैं। इस योजना के तहत छह महीने से भी कम समय में छह करोड़ से अधिक के ऋण बांटे जा चुके हैं। पात्र व्यक्ति एक लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त कर सकता है। सुंदरम के अनुसार, चूंकि सहकारिता सहभागिता योजना के सभी फीचर्स दीन दयाल उपाध्याय किसान कल्याण योजना में शामिल कर लिए गए हैं। अत: पहले से से चल रही योजना को आगे बढ़ाना सही नहीं होगा। इससे डुप्लीकेसी की आशंका बनी रहेगी। इस कारण इस योजना के तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।

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